आनंद ही आनंद ! - रैपिड में स्वर्ण तो ब्लिट्ज़ में कांस्य
31/12/2017 -और उन्होने एक और कारनामा कर दिखाया यह सिर्फ आनंद ही कर सकते थे और उन्होने बताया की वह खेल जिसके लिए वह बचपन से लाइटनिंग किड के नाम से जाने जाते थे वह आज भी उनकी खासियत है । 48 वर्ष की उम्र में अपनी उम्र से आधे से भी कम के खिलाड़ियों को पराजित करते हुए उन्होने विश्व रैपिड का स्वर्ण तो विश्व ब्लिट्ज़ का कांस्य पदक हासिल किया । दोनों फॉर्मेट में मिलाकर खेल गए कुल 36 मैच में से आनंद नें 15 मैच जीते .20 ड्रॉ रहे जबकि सिर्फ 1 में उन्हे हार का सामना करना पड़ा । रैपिड में उन्होने अंतिम मुक़ाबले में ग्रीसचुक तो ब्लिट्ज़ में मेक्सिम लाग्रेव को हराते हुए दिखाया की उनमे अब भी दबाव के क्षणो में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है और सच तो यह है की फिलहाल विश्व शतरंज में उनसे ज्यादा अनुभव किसी के पास है ही नहीं ! पढे यह लेख